जाने कौन थे टंट्या भील सम्पूर्ण जानकारी


जोहर दोस्तों,  दुश्मन की गोलियों का सामना हम करेंगे आजाद है आजाद ही रहे ऐसे ही देश की आजादी के लिए आखिरी दम तक लड़ने वाले आदिवासी शूरवीर और जननायक के बारे में आज हम बात करने वाले हैं जिनका नाम है टंट्या भील जिसे अंग्रेज इंडियन रॉबिन हुड भी कहते थे

आज हम टंट्या भील (tantya bhil) के बारे में सम्पूर्ण 360 डिग्री समझने वाले है जैसे की उनके निजी जीवन के बारे में ऐतिहासिक दृष्टिकोण से स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका के बारे में और करंट अफेयर व न्यूज में क्यों रहें हर एक पहलू को ठीक से समझने के लिए आपको मेरे साथ इस पोस्ट में अंत तक बने रहना होगा

टंट्या भील का जन्म 26 जनवरी 1840 में मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की पंधाना तहसील के बड़दा गांव में हुआ टंट्या भील के पिता का नाम भावसिंह व माता जीवणी था जनता तांत्या भील का दुबला पतला शरीर होने के कारण उन्हें टंट्या कह कर पुकारा जाने लगा क्योंकि टंट्या भील (tantya bhil) का संबंध मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र से रहा है

निमाड़ में ज्वार के पौधे को सूखने के बाद लंबा ऊंचा पतला होने से टंटा कहा जाता है इसीलिए लोग टंट्या भील को टंट्या कह के पुकारने लगे टंट्या भील (tantya bhil) को उनके पिता ने लाठी, गोफन व तीर कमान चलाने का प्रशिक्षण दिया

टंट्या ने धनुर्विद्या में भी दक्षता हासिल कर ली थी और उन्हें लाठी और गोफन कला में महारत प्राप्त थी दावा या फलिया उनके मुख्य हथियार थे उन्होंने बंदूक चलाना भी सीख लिया था

टंट्या भील महत्वपूर्ण जानकारी (tantya bhil important information in hindi)

नाम तात्या टोपे (टंट्या भील और टंट्या मामा)
पिता का नाम भावसिंह 
माता का नाम जीवणी 
जाति भील 
राज्य मध्‍य प्रदेश 
जिला खंडवा 
तहसील पंधाना 
गाँव बड़दा
जन्म तारीख 26 जनवरी1842 
मृत्यु  तारीख 4 दिसंबर 1889
मौत की वजहअंग्रेजों द्वारा फांसी 
समाधि स्थल पातालपानी, मध्य प्रदेश
उपनाम‘रॉबिनहुड ऑफ इंडिया’ 
क्यों थे फेमस भारत के पहले स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी थी।

टंट्या भील (tantya bhil) को मिले सम्मान से जुडी कुछ अन्य बाते

  • Tantya bhil jayanti – टंट्या भील को याद करते हुवे 26 जनवरी को जयंती एवं 4 दिसंबर को बलिदान दिवस मनाया जाता है
  • Tantya bhil full movie – टंट्या भील के जीवन पर आधारित कई आत्मकथा और यूट्यूब पर शार्ट मूवीज बनी हुवी है लेकिन एक फेमस मूवी 2014 में बानी है
  • Tantya bhil chouraha indore – साल 2023 में मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भवरकुआं नामक फेमस चौराह का नाम बदलकर टंट्या भील चौराह रखा गया है
  • Tantya Bhill Arthik Kalyan Scheme 2023 – इस योजना में  मध्‍यप्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बनाई गई है। इस योजना के तहत 10 हजार रुपये से 1 लाख रुपये तक की वित्‍तीय मदद की जाती है।
  • Tantya bhil railway station – पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर आदिवासी वीर योद्धा टंट्या भील के नाम पर रखा गया है
  • Tantya bhil puraskar – जननायक टंट्या भील के नाम पर मध्य प्रदेश में राज्य स्तरीय सम्मान यह शिक्षा और खेल गतिविधियों में उल्लेखनीय साधना तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए आदिवासी युवा को दिया जाता है 
  • Tantya bhil bus stand – तांतिया मामा को भी एमआर 10 पर बन रहे आईएसबीटी इंटर स्टेट बस स्टैंड का नाम बदलकर ‘टंट्या मामा’ करने के निर्णय से मान्यता मिली

tantya mama bhawarkua statue photos

Tantya mama chavurah Indore

स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका के बारे में 

टंट्या भील (tantya bhil)  एक प्रसिद्ध सेनानी थे जिनकी बहादुरी के कारण उन्हें अंग्रेजों द्वारा इंडियन रोबिन हुड  का उपनाम दिया गया तान्या भील एक ऐसे योद्धा थे जिन्होंने अंग्रेजों को लूटा पर गरीबों में धन बट दिया

टंट्या भील  एक विद्रोही थे जिन्होंने गरीबों का शोषण कि ब्रिटिश पॉलिसी के खिलाफ आवाज उठाई और इसी वजह से वह गरीब आदिवासियों के मसीहा बन गए

तांत्या भील ब्रिटिश सरकार के सरकारी खजानो को लुटते और उनके चाटुकार की संपत्ति को गरीबों और जरूरतमंदों में बाट देते थे गरीबों के प्रति उनकी इसी दरियादिली की वजह से उन्हें सभी आयु वर्ग के लोग लोकप्रिय रूप से उन्हें  मामा कह के पुरकरते थे

इसीलिए मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई आदिवासी अपने घरों में आज भी टंट्या भील की पूजा करते है

साल 1757 के बैटल ऑफ प्लासी के कुछ समय बाद ही आदिवासी विद्रोह शुरू हो गया और यह 20 वी शताब्दी  की शुरुआत तक चला 1857 से 1889  तक टंट्या भील ने ब्रिटिश हुकूमत की नाक में दम कर रखा वे अंग्रेजों पर हमला करते और अपनी गुरिल्ला टेकनीक से परिंदे की तरह गायब हो जाते हैं

आदिवासी समुदाय में ऐसी मान्यता है कि टंट्या भील को जादुई छमताये  प्राप्त थी इन्हीं शक्तियों का प्रयोग कर व लगभग सत्रह सौ गांव में एक साथ सभा आयोजित करते थे यहां तक कि ब्रिटिश सैनिक भी उनकी क्षमताओं के कारण ने पकड़ नहीं पाए

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इसके अलावा टंट्या भील के बारे में एक इंटरेस्टिंग फैक्ट यह भी है की वह सभी जानवरों की मूक भाषा समझते और जानते थे

टंट्या भील (tantya bhil) उन महान क्रांतिकारियों में से एक थे जिन्होंने बारह साल तक ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष किया और विदेशी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए अपनी जान की बाजी लगादी

लेकिन आखिर कैसे इतने तेज फुर्तीले टंट्या भील को ब्रिटिश सरकार पकड़ पाई आइए देखते हैं

तांत्या भील को उनकी औपचारिक बहन के पति गणपत के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया

उन्हें इंदौर के ब्रिटिश प्रेसिडेंसी क्षेत्र के सेंट्रल इंडिया एजेंसी जेल में रखा गया बाद में उन्हें जबलपुर ले जाया गया जबलपुर में उन्हें भारी जंजीरों से जकड़ कर रखा गया जहां ब्रिटिश अधिकारियों ने अमानवीय रूप से प्रताड़ित किया सत्र न्यायालय जबलपुर में 19 अक्टूबर 1899 को फांसी की सजा सुनाई थी, फिर 4 दिसंबर 1889 को फांसी दी गई 

भील समुदाय के मसीहा को फांसी देने की वजह से ब्रिटिश सरकार भील विद्रोह से डरी हुई थी इसी  कारण फासी के बाद खंडवा रेल मार्ग पर पातालपानी रेलवे स्टेशन के पास रात में चुपचाप से उनके शव को उस जगह फेंक दिया गया जहां उनका लकडी का पुतला रखा हुआ था

आज ही स्थान टंट्या मामा की समाधि के नाम से जाना जाता है टंट्या मामा की गिरफ्तारी की खबर न्यूयॉर्क टाइम्स के 10  नवंबर 1889 के अंक में फ्रंट पेज पर प्रकाशित हुई

इस समाचार में टंट्या भील को भारत के रॉबिन हुड के रूप में मेंशन किया गया दोस्तों इससे आप उनकी छवि और उनके बारे में अनुमान लगा सकते हैं

आज टंट्या मामा (tantya bhil) की इसी शहादत और क्रांतिकारी योगदान की सम्मान देने के लिए 4 दिसंबर को टंट्या भील बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है

साथ ही 4 दिसंबर 2021 को माननीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यपाल श्री मंगू भाई पटेल के द्वारा बलिदान दिवस पर अष्ट धातु के बने दस फीट ऊंची जननायक टंट्या मामा की भव्य प्रतिमा को पातालपानी में उद्घाटन किया था 

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पातालपानी में चार करोड़ पचपन लाख रुपए की लागत से नौ तीर्थ स्थल बनाया जाएगा जहां एक ध्यान का केंद्र स्थापित किया जाएगा जहां वीरता की पूजा की जाएगी जो कि नई युवा पीढ़ी को देशभक्ति के लिए प्रेरित करेगी हर साल चार दिसंबर को जननायक तांत्या मामा का बलिदान दिवस के रूप में पातालपानी में मेले का आयोजन भी किया जाएगा और अच्छी बात तो यह है की इंदौर के भवरकुआं चौराहा और पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर टंट्या भील के नाम पर रख दिया गया

टंट्या भील (tantya bhil) की लोकप्रियता और बहादुरी के किस्से सुनकर मुझे शहीद भगत सिंह की चार पंक्तियाँ याद आ रही है दोस्तों

“लिख रहा हूँ में अंजाम जिसका,लिख रहा हूँ में अंजाम जिसका कल आगाज आएगा मेरे लहू का हर एक कटरा इंकलाब लाएगा में राहू या ना रहूं पर यह वादा है तुमसे मेरा कि मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आएगा

आखिर में

दोस्तों शहीद भगत सिंह के जन्म से लगभग सौ साल पहले जन्मे टंट्या भील (tantya bhil) पर भी यह पंक्तियां खूब जमती है ना हमें कमेंट करके जरूर बताए और इस पोस्ट को अपने आदिवासी भाइयो के साथ जरूर शेयर करे 

टंट्या भील के लिए अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

टंट्या भील का वास्तविक नाम क्या था?

तांत्या भील का रियल नाम तांत्या टोपे था।

टंट्या भील को पहली बार कहाँ पकड़ा था?

टंट्या भील को अप्रैल 1859 में भारत में ब्रिटिश सेना ने पकड़ लिया था।

टंट्या भील ने अपने सैन्य अभियानों में क्या रणनीति अपनाई?

तांतिया भील ने गुरिल्ला युद्ध रणनीति अपनाई, जिसमें आश्चर्यजनक हमले, घात और हिट-एंड-रन युद्धाभ्यास शामिल थे।

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